शिक्षण से आप क्या समझते हैं?

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शिक्षण क्या है? शिक्षण से आप क्या समझते हैं?

शिक्षण से आप क्या समझते हैं? के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि शिक्षण क्या है? शिक्षण की विशेषताएं क्या है आदि।

शिक्षण क्या है?

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यह शब्द शिक्षा धातु से बना है, जिसका अर्थ है सीख देना या सिखाना। अर्थात यह एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें एक व्यक्ति द्वारा दुसरे व्यक्ति को ज्ञान प्रदान किया जाता है। दरअसल एक व्यक्ति के द्वारा दुसरे व्यक्ति को ज्ञान देने की क्रिया अपने आप में संपन्न होती है।

विचारवादी दर्शन के अनुसार शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को आत्मनुभूति की ओर बढ़ने में सहायता मिलती है।

असल में शिक्षण, शिक्षक तथा विद्यार्थी के बीच होने वाली एक अन्तः क्रिया है ,जिसके परिणामस्वरूप छात्रों के व्यवहार में परिवर्तन होता है। और उसके ज्ञान में वृद्धि होती है।

यथार्थवादी दर्शन में शिक्षण को एक व्यवस्थित क्रिया माना गया है। जिसके द्वारा एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति को विकास प्रक्रिया का अनुसरण करता है। और उसका अनुसरण करता है।

शिक्षण की परिभाषाएं

रायबर्न के अनुसार (according to Ryburn) ,”शिक्षण एक सम्बन्ध है जो विद्यार्थी को उसकी शक्तियों के विकास में सहायता देता है।”

बी.ओ.स्मिथ (B.O. Smith) के अनुसार ,” शिक्षण क्रियाओं की व्यवस्था है जो सीखने की उत्सुकता जाग्रत करती है। ”

क्लार्क (Clarke) के शब्दों में ,”शिक्षण वह प्रक्रिया है जिसके प्रारूप तथा परिचालन की व्यवस्था इसलिए की जाती है ,जिसके छात्रों के व्यवहार में परिवर्तन लाया जा सके।”

के.पी. पांडेय के शब्दों में,”शिक्षण एक व्यवस्थित क्रियाओं का समन्वित रूप है जिसमें अन्तः क्रिया द्वारा शिक्षण सुप्रयास एवं योजनाबद्ध तरीके से पूर्व नियत अधिगम लक्ष्यों की संप्राति हेतु उपस्थित सामाजिक पर्यावरण में कार्यशील होता है।”

अधोलिखित परिभाषाओं के माध्यम से यह कहना उचित है कि, शिक्षण मानवीय कार्यों का एक ऐसा उदाहरण है जिसका उद्देश्य कार्य करने की मानवीय क्षमता को बढ़ाना है।

शिक्षण एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया है जो समाज में परिवर्तन होने की वजह से प्रभावित होती है।

गौरतलब है कि सभी शिक्षाशास्त्रियों ने अपने-अपने विचारों से शिक्षण की परिभाषा देने का प्रयास किया है।

सही अर्थों में शिक्षण की ऐसी परिभाषा देना कठिन है जो की सर्वमान्य एवं उपयुक्त हों ,परन्तु शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सिखाना होता है।

उन्हें ज्ञान प्रदान करना होता है ,जिससे उनके व्यवहार में परिवर्तन हो सके।

शिक्षण की प्रकृति तथा विशेषताएँ

जैसा कि परिभाषाओं से साबित होता है कि शिक्षण में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करता है, इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि शिक्षण में कई बार एक से अधिक व्यक्ति शामिल होते हैं।

शिक्षण की विशेषताओं तथा अवधारणाओं को निम्न बिंदुओं से जाना जा सकता है-

यह बहुत सी क्रियाओं की व्यवस्था है

शिक्षण की प्रक्रिया हमेशा बहुत-सी क्रियाओं से मिलकर तैयार होती है। इन क्रियाओं को क्रमबद्ध रूप से व्यवस्था किया जाता है।

जैसे किसी वस्तु विशिष्ट को प्रस्तुत करना, उससे सम्बंधित प्रश्न पूछना, समझाने हेतु निर्देश आदि देना, प्रोत्साहित करना, आदि क्रियाएं शिक्षण में शामिल होती हैं।

शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है

शिक्षण कि प्रक्रिया को कभी भी एक व्यक्ति के माध्यम से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। शिक्षण में समाज के अलग अलग तत्व शामिल होते हैं।

जैसे शिक्षक तथा छात्रों का होना। इसी गुण के कारण शिक्षण को सामाजिक प्रक्रिया कहा जाता है।

यह एक अंतः क्रियात्मक प्रक्रिया है

शिक्षण में छात्र तथा शिक्षक दोनों ही पूर्ण रूप से सक्रिय होते हैं। और वे विषय-वस्तु के माध्यम से मानसिक स्तर पर आदान-प्रदान करते हैं ।

इसी कारण से शिक्षण को अन्तः क्रियात्मक प्रक्रिया कहा जाता है।

यह एक उद्देश्यात्मक प्रक्रिया है

शिक्षण के माध्यम से कुछ उद्द्येश्यों को पूरा किया जाता है। और ये सभी उद्देश्य शिक्षण से पूर्व निर्धारित किये जाते हैं। इन उद्देश्यों के अभाव में शिक्षण की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

यह आमने-सामने होने वाली प्रक्रिया है

शिक्षण को दूर से कर पाना थोड़ा मुश्किल है। जब तक छात्र तथा अध्यापक आमने सामने ना हों तो शिक्षण का उद्देश्य पूर्ण नहीं होता। अतः इसको आमने सामने होने वाली प्रक्रिया कहना गलत नहीं है।

यह एक व्यावसायिक प्रक्रिया है

इसको हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह एक प्रकार का व्यवसाय है जिसके ऊपर ध्यान देना अति आवश्यक हो जाता है।

यह एक उपचारात्मक प्रक्रिया है

इस प्रक्रिया के द्वारा बच्चों की कमज़ोरियों का निदान किया जा सकता है। शिक्षण के माध्यम से बालकों की समस्याओं को सुनकर उनका उपचार करना शामिल होता है।

जिसकी वजह से बच्चों के व्यवहार में सुधार होता है और उनमे परिवर्तन होते हैं।

यह एक विकासात्मक प्रक्रिया है

शिक्षण के द्वारा छात्रों की समस्याओं का हल किया जाता है। जिसके माध्यम से उनके व्यवहार में निरंतर विकास होता है । साथ ही साथ उसके ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है।

इसलिए शिक्षण को विकासात्मक प्रक्रिया मन गया है।

शिक्षण निर्देशन की प्रक्रिया है

इस प्रक्रिया द्वारा न सिर्फ समस्याओं का समाधान की जाता है बल्कि विद्यार्थिओं को निर्देश भी दिए जाते हैं। इसीलिए शिक्षण को निर्देशन की प्रक्रिया कहा जाता है।

शिक्षण व्यवहार में परिवर्तन लाता है

इस प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थियों के व्यवहार में परिवर्तन होते है। व्यवहार में होने वाले ये परिवर्तन अपेक्षाकृत स्थायी होते है। व्यवहार में होने वाले ये परिवर्तन किसी भी दिशा में हो सकते हैं।

शिक्षण एक कला भी है और विज्ञान भी

शिक्षण को कला और विज्ञान दोनों ही माना जाना गलत नहीं है। कई लोग शिक्षण को कला के रूप में स्वीकार करते है तो कई लोग विज्ञान के रूप में।

शिक्षकों को प्रशिक्षण के द्वारा तैयार किया जा सकता है इसलिए शिक्षण को विज्ञान कहा जाता है। लेकिन कुछ लोग शिक्षकों को भगवान् का रूप मानते है क्योंकि शिक्षक में ही शिक्षण देने की कला होती है।

शिक्षण एक परिवर्तनशील प्रक्रिया है

न तो शिक्षण के साधन हमेशा सामान रहते और न ही शिक्षण की विधियां।अर्थात समय और परिस्तिथियों के अनुसार शिक्षण में परिवर्तन होता रहता है।

इसीलिए शिक्षण को परिवर्तनशील प्रक्रिया कहा जाता है।

यह एक भाषाई प्रक्रिया है

शिक्षण कराने के लिए भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। सांकेतिक रूप से शिक्षा प्रदान करना और ग्रहण करना दोनों ही असंभव है। अतः भाषा के बिना किसी भी विषय के शिक्षण की कल्पना नहीं की जा सकती। और हर शिक्षण में किसी भाषा का प्रयोग अनिवार्य होता है।

इसलिए शिक्षण को भाषाई प्रक्रिया कहा गया है।

शिक्षण का अवलोकन किया जा सकता है

इस प्रक्रिया का वैज्ञानिक ढंग से अवलोकन और विश्लेषण किया सकता है। शिक्षा प्रदान करके उसका मूल्यांकन आसान हो जाता है। अतः शिक्षण के द्वारा विद्यार्थी के व्यवहार में भी वांछित परिवर्तन किये जा सकते हैं।

शिक्षण एक तर्कसम्मत प्रक्रिया है

शिक्षण के माध्यम से तर्क-वितर्क के रास्ते भी खुलते है। शिक्षण में तार्किक प्रक्रिया का बहुत महत्व है। तार्किक प्रक्रिया का दूसरा अर्थ है विश्लेषण करना ,परिभाषिकरण करना, वर्गीकरण करना, विश्लेषण तथा संश्लेषण करना इत्यादि।

आशा करते है शिक्षण से आप क्या समझते हैं?का यह आर्टिकल आपको अवश्य ही पसंद आया होगा। शिक्षण से आप क्या समझते हैं? के आर्टिकल में हमको इन सभी प्रश्नों के उत्तर मिल पाएंगे- शिक्षण से आप क्या समझते है ? शिक्षण की विशेषताएं क्या है ? शिक्षण से आप क्या समझते हैं? शिक्षण से आपका क्या अभिप्राय है?

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